पेरू के पूर्व राष्ट्रपति ने खुद को मारी गोली, मौत

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लीमा (न्यूज़ नेस्ट)I भ्रष्टाचार के एक मामले में पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए बुधवार को पेरू के पूर्व राष्ट्रपति एलन गार्सिया ने घर में स्वयं को गोली मार ली। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां पर उनकी मौत हो गई। वह 69 वर्ष के थे। कुशल वक्ता के तौर पर प्रख्यात गार्सिया दो बार (1985-90 और 2006-11) देश के राष्ट्रपति रहे। पहली बार उन्होंने जहां फायरब्रांड वामपंथी नेता के तौर पर जीत दर्ज की थी। दूसरी बार मुक्त व्यापार और निवेश के नाम पर पांच साल तक पेरू पर शासन किया था।आंतरिक मंत्री कार्लोस मोरान के मुताबिक जब पुलिस पूर्व राष्‍ट्रपति के घर उन्‍हें गिरफ्तार करने पहुंची, तो उन्‍हें उनसे कुछ देर रुकने की बात कही थी। ये कहकर वह कमरे में चले गए और उसका दरवाजा बंद कर लिया। पुलिस को अगले ही पल गोली चलने की आवाज आई। आवाज सुनकर पुलिस गेट तोड़कर अंदर दाखिल हुई तो गार्सिया कुर्सी पर थे और उनके सिर से खून बह रहा था। उन्‍हें तुरंत अस्‍पताल ले जाया गया था जहां उन्‍होंने दम तोड़ दिया। आपको बता दें कि गार्सिया पर ब्राजील की कंपनी से रिश्‍वत लेने का आरोप था, जिसकी जांच पुलिस कर रही है। उनके समर्थक इन आरोपों को सरकार की उपज बता रहे हैं।
गार्सिया की अमेरिकन पापुलर रेवोल्यूशनरी अलांयस (अप्रा) के महासचिव ओमर कसेडा ने कहा कि एलन गार्सिया की मौत हो गई है, लेकिन अप्रा लंबे समय तक रहेगा। पेरू के वर्तमान राष्ट्रपति मार्टिन विजकार्रा ने एक ट्वीट में हादसे के प्रति सहानुभूति जताई है।
उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘पूर्व राष्ट्रपति एलन गार्सिया की मौत से गहरा धक्का लगा है। मैं उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।’ पेरू के स्वास्थ्य मंत्रलय ने बताया कि गोली गार्सिया के सिर से होकर गुजरी। स्वास्थ्य मंत्री जुलेमा टॉमस ने बताया कि आपातकालीन सर्जरी के दौरान गार्सिया को तीन बार कार्डिक अरेस्ट का भी सामना करना पड़ा।
आपको यहां पर बता दें कि गार्सिया अपरिस्‍टा पार्टी के एकमात्र नेता थे जिन्‍होंने देश की कमान संभाली थी। हालांकि उनका राजनीतिक जीवन बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहा। 1985 में जब वह पहली बार देश के राष्‍ट्रपति बने थे तब देश आर्थिक संकट और हिंसा की चपेट में था। 2006 में वह दोबारा राष्‍ट्रपति चुने गए। उस वक्‍त वैश्विक स्‍तर पर मेटल की कीमत में तेजी का दौर था। उनके इस दौर में भी उनकी काफी आलोचना हुई और देश में सामाजिक टकराव काफी बढ़ गया था।                                            गार्सिया बेहद मध्‍यम वर्गीय परिवार से ताल्‍लुक रखते थे। उनके पिता भी राजनीति में थे। जिस गार्सिया का जन्‍म हुआ तब उनके पिता जेल में थे। गार्सिया की अपने पिता से पहली मुलाकात ही पांच वर्ष की उम्र में हुई थी। राजनीति का पहला सबक उन्‍होंंने अपने पिता से ही सीखा। शुरुआत से ही वह अपने पिता के साथ पार्टी की मीटिंग में जाते थे। 14 वर्ष की आयु तक वह अच्‍छे वक्‍ता बन चुके थे। इसी उम्र में उन्‍होंने अपना पहला भाषण भी दिया था। वह खुद को कानून में डाक्‍टरेट बताते थे लेकिन सेन मार्कोस यूनिवर्सिटी के मुताबिक उन्‍होंने अपनी पीएचडी पूरी नहीं की थी। वह पेरिस में भी पढ़ने गए और जब वहां से 1978 में वापस लौटे तो देश में चुनावी माहौल था। गार्सिया ने दो शादियां की थींं। इसके बाद भी वह अन्‍य महिला से संबंधों की वजह से चर्चा में बने रहे।
हालांकि गार्सिया ऐसे पहले राष्‍ट्राध्‍यक्ष नहीं हैं जिन्‍होंने इस तरह का कदम उठाया हो। 1900 से लेकर आज तक के समय पर नजर डालें तो करीब डेढ़ दर्जन लोगों के नाम इस फहरिस्‍त में शामिल हैं। 2001 के बाद से अब तक पांच राष्‍ट्राध्‍यक्ष इस तरह से अपनी जान दे चुके हैं। 2001 में नेपाल के किंग दिपेंद्र, 2003 में होंड्रस के कार्लोस रोबर्टो रिना, 2009 में दक्षिण कोरिया के रो-मो-ह्यू ने भी आत्‍महत्‍या कर अपनी जीवन लीला खत्‍म की थी।

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Pankaj Tyagi

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