पीयूष गोयल ने दिया आश्वासन कि वे कोयले का संकट नहीं होने देंगे

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गर्मी के दिनों में बिजली का संकट खड़ा हो जाता है। इन दिनों जलाशयों में पानी कम हो जाता है, जिसका प्रभाव बिजली उत्पादन पर पड़ता है। ताप बिजली घर इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें कोयले की आपूर्ति भरपूर नहीं हो पाती है। बिजली संकट बढ़ने का हालांकि एक कारण गर्मी में बिजली की खपत बढ़जाना भी होता है। इसके बावजूद कोयला एवं रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने आश्वासन दिया है कि वे कोयले का संकट नहीं होने देंगे। इसी प्रकार रेलवे में निजीकरण का भ्रम फैलाया जा रहा है।
इस बारे में भी श्री गोयल ने गत दिनों स्पष्ट रूप से कहा था कि सरकार का ऐसा होई विचार नहीं है और रेलवे के निजीकरण की बात सिर्फ अफवाह है। रेलवे बहुत बड़ा नेटवर्क है और इसके कुछ क्षेत्रों में निजीकरण के दरवाजे जरूर खोले गये हैं लेकिन रेलवे का मुख्य ढांचा सरकार ही संभालेगी, उसमें निजीकरण नहीं लोगा।
केंद्रीय रेल एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल कहते हैं कि रेलवे के निजीकरण की सरकार की कोई योजना नहीं है। बहरहाल रेल नियामक की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। सरकार के 4 साल पूरे होने के मौके पर श्री गोयल ने कहा, हम रेलवे का निजीकरण नहीं करने जा रहे हैं और ऐसी कोई योजना भी नहीं है। रेलवे ने करीब एक महीने पहले रेल कारों में निजी क्षेत्र से निवेश के दरवाजे खोल दिए थे, जिसके बाद सरकार का यह बयान आया है। इसका मकसद विभिन्न जिंसों की आवाजाही सुनिश्चित करना है और इसके लिए किसी विशेष मंजूरी की जरूरत नहीं है।
रेल विकास प्राधिकरण (आरडीए) के बारे में मंत्री ने कहा, रेल नियामक की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। माना जा रहा है कि नियामक या रेल विकास प्राधिकरण (आरडीए) शुल्क संबंधी मसलों पर विचार करेगा और इसके पिछले साल अगस्त से काम किए जाने की उम्मीद की जा रही थी। अप्रैल 2016 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेल नियामक स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। उसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि आरडीए के चेयरमैन और सदस्यों का चयन 15 जुलाई 2017 तक कर लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उद्योग जगत के सूत्रों ने कहा कि चुनावी साल में इसकी संभावना कम है कि सरकार रेल किराये जैसे संवेदनशील मसले पर अहम फैसले करे।
इसी क्रम में श्री गोयल ने कहा कि बिजली संयंत्रों को भरपूर कोयला मिलेगा। उन्होंने कहा कोयला एवं रेल मंत्रालय यह सुनिश्चित करेंगे कि बिजली संयंत्रों को कोयले की पर्याप्त आपूर्ति हो। उन्होंने कहा, अप्रैल-मई के दौरान रेल से कोयले की ढुलाई करीब 14 प्रतिशत बढ़ी है। इसके अलावा इस अवधि के दौरान कोयले के उत्पादन में भी करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बहरहाल रेलवे अपनी सहायक इकाइयों राइट्स लिमिटेड, इरकॉन इंटरनैशनल और आरवीएनएल की सूचीबद्धता की योजना पर आगे बढने जा रही है। गोयल ने कहा कि भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) और भारतीय रेल वित्त निगम (आईआरएफसी) की सूचीबद्धता की योजना अभी रोक दी गई है।
श्री गोयल ने कहा, मैंने आईआरसीटीसी की सूचीबद्धता में मूल्यांकन की वजहों से देरी की है। आईआरसीटीसी के पास उपलब्ध डेटाबेस का मूल्य शामिल नहीं किया गया। इसी तरह से आईआरएफसी के मामले में सूचीबद्धता कर संबंधी मसले को लेकर रुकी है और हम कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ मिलकर इसके समाधान की कवायद कर रहे हैं। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ आईआरएफसी का विवाद 63.92 अरब रुपये संचित विलंबित कर देयता को लेकर है।
आईआरएफसी विलंबित कर देयता के मसले से जूझ रही है क्योंकि उसका मूल्य हृास मुनाफे से कम था। कंपनी ने सामान्य कर आकलन के मुताबिक कर का भुगतान नहीं किया और यह 21 प्रतिशत न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) के विचाराधीन था। इसके अलावा इसने 35 प्रतिशत विलंबित टैक्स करदेयता का प्रावधान किया। इस तरह से कंपनी के ऊपर कुल कर देयता 56 प्रतिशत हो गई। एक अधिकारी ने इस मसले पर स्पष्टता की कुछ कमी है, जिसकी वजह से आईआरएफसी की हिस्सेदारी की बिक्री में देरी हो सकती है। मंत्री ने कहा कि रेलवे का सुरक्षा रिकॉर्ड 2017-18 में शानदार रहा और 2013-14 में जहां 118 दुर्घटनाएं हुई थीं, वहीं 2017-18 में घटकर 62 रह गईं। गोयल ने कहा, सुरक्षा हमारी प्राथमिकता में है। नई लाइनें बिछाने का काम 59 प्रतिशत बढ़ा है। इसके अलावा लाइनों के नवीकरण का काम भी बढ़कर 2017-18 में करीब 4,000 किलोमीटर पहुंच गया है।
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने यह बात कईबार कही कि रेलवे को निजी हाथों में सौंपने की कोई योजना नहीं है। गोयल ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा। उन्होंने बीते चार वर्ष में अपने मंत्रालय की उपलब्धियां गिनाई। उन्होंने कहा, ‘‘चलिए इसे एकदम स्पष्ट कर देते हैं कि रेलवे का अभी या कभी भी निजीकरण करने की कोई योजना नहीं है।’’ रेलवे, प्रोद्यौगिकी अद्यतन जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश को आमंत्रित कर रहा है लेकिन इसके कारण राष्ट्रीय परिवहन को निजी हाथों में सौंपने की चिंताएं भी उभर रही हैं।
रेलवे संघों ने मंत्रालय से इस पर स्थिति साफ करने की मांग की थी। अपने मंत्रालय की उपलब्धियां गिनाते हुए गोयल ने कहा कि नई लाइन बिछाने की औसत रफ्तार 59 फीसदी बढ़ गई है। वर्ष 2009 से 2014 के बीच यह प्रतिदिन 4.1 किमी थी जो 2014-2018 के बीच बढ़कर प्रतिदिन 6.53 किमी हो गई। बुलेट ट्रेन परियोजना के बारे में गोयल ने कहा कि वह पटरी पर है। उन्होंने कहा, ‘इस देश में किसी भी विकास परियोजना या नए विचारों के साथ कोई न कोई मुद्दे जुड़े होते हैं लेकिन हमें उनके समाधान निकालकर आगे बढ़ना होगा।’ उन्होंने दो मोबाइल एप्लिकेशन भी लांच की। इनमें से एक है रेल मदद और दूसरे मेन्यू ऑन रेल्स।

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Pankaj Tyagi

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